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ईरान ने फिर किया अमेरिका का F-35 लड़ाकू विमान मार गिराने का दावा, जारी किया मलबे का वीडियो; अमेरिका बोला- ‘फैलाया जा रहा झूठ’

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तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव कम होने का नाम ही नहीं ले रहा हैं। दोनों देश अपने-अपने हिसाब के कई बड़े दावे कर रहे हैं। कभी अमेरिका कहता है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है। वहीं, इन सबके बीच ईरान की ओर से भी बड़ा दावा किया गया है। ईरान के सरकारी मीडिया ने कहा है कि उसकी सेना ने एक और अमेरिकी एफ-35 स्टील्थ लड़ाकू विमान को मार गिराया है।

ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ने मध्य ईरान के आसमान में एक अमेरिकी F-35 विमान को नष्ट कर दिया। एजेंसी ने विमान के मलबे की तस्वीरें भी जारी की हैं और कहा है कि यह विमान अमेरिका के लेकनहीथ स्क्वाड्रन का था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि विमान पूरी तरह तबाह हो गया और पायलट के बचने की संभावना बहुत कम है। क्या सच में ईरान ने दूसरा F-35 गिराया? ईरान का दावा है कि पिछले 24 घंटों में यह दूसरा F-35 विमान है जिसे मार गिराया गया है। इससे पहले 2 अप्रैल और 23 मार्च को भी ऐसे ही दावे किए गए थे। ईरान लगातार कह रहा है कि उसने अमेरिकी आधुनिक लड़ाकू विमानों को निशाना बनाया है और उन्हें गिराया है।
अमेरिका ने इन दावों को क्यों खारिज किया? अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम ने ईरान के इन दावों को पूरी तरह झूठ बताया है। अमेरिका का कहना है कि उसके सभी लड़ाकू विमान सुरक्षित हैं और ईरान पहले भी कई बार ऐसे गलत दावे कर चुका है। अमेरिका का दावा है कि ईरान की ओर से फैलाए जा रहे वीडियो और तस्वीरें भ्रामक हैं। एआई ने क्या बताया?
  • तस्वीरों में F-35 की पहचान से जुड़े जरूरी फीचर्स नहीं दिखते।
  • मलबे पर अमेरिकी एयरफोर्स के सामान्य निशान (USAF स्टार, टेल कोड) नजर नहीं आते।
  • तस्वीरों में दिख रहा डिजाइन F-35 के स्टील्थ स्ट्रक्चर से मेल नहीं खाता।
  • कुछ हिस्सों पर EUROPE लिखा दिख रहा है, जो संदिग्ध माना गया।
  • यह किसी पुराने विमान के मलबे की तस्वीर हो सकती है।
  • तस्वीरों में F-35 की खास कोटिंग और मटेरियल के संकेत नहीं हैं।
  • किसी स्वतंत्र या विश्वसनीय स्रोत से इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है।
क्या पहले भी ऐसे दावे हुए हैं? 23 मार्च के मामले में अमेरिका ने कहा था कि उसका एक F-35 विमान मिशन के बाद तकनीकी कारणों से मध्य पूर्व के एक बेस पर सुरक्षित उतरा था। वहीं 2 अप्रैल के दावे को भी अमेरिका ने खारिज कर दिया था। इससे साफ है कि दोनों देशों के बीच सूचना युद्ध भी चल रहा है। क्या इस टकराव से बढ़ेगा खतरा? ईरान और अमेरिका के बीच यह टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। फरवरी से शुरू हुआ यह संघर्ष अब नए दावों और जवाबी बयानों में बदल गया है। ऐसे हालात में क्षेत्रीय तनाव बढ़ने का खतरा है, खासकर होर्मुज जैसे अहम इलाके में जहां से दुनिया का बड़ा तेल व्यापार गुजरता है।

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