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छत्तीसगढ़: शादियों के नाम पर ठगी करने वाले 3 और पकड़ाए, लड़कियों की फर्जी फोटो दिखाकर करते थे ठगी
- Super Admin
- 12 Apr, 2026
राजनांदगांव। पुलिस ने शादियों के नाम पर ठगी करने वाले "मैरिज ब्यूरो" के खिलाफ कार्रवाई की है। बसंतपुर पुलिस ने इस गिरोह से जुड़े तीन और आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इनमें से दो आरोपियों को कबीरधाम (कवर्धा) से पकड़ा गया है, जबकि एक महिला आरोपी की गिरफ्तारी राजनांदगांव से हुई है।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह "लव लाइफ रिश्ते मैरिज ब्यूरो" के नाम से एक कार्यालय चला रहा था। आरोपी इंटरनेट से लड़कियों की सुंदर तस्वीरें डाउनलोड कर फर्जी प्रोफाइल बनाते थे। इन फर्जी प्रोफाइलों को शादी के इच्छुक युवकों को व्हाट्सऐप पर भेजा जाता था।
युवकों को झांसे में लेकर रजिस्ट्रेशन, विभिन्न पैकेज और 'फैमिली मीटिंग' के नाम पर उनसे मोटी रकम वसूली जाती थी। इस तरह वे ठगी को अंजाम देते थे।
लाखों की ठगी कर चुके थे आरोपी
पुलिस ने जब आरोपियों के बैंक खातों के पिछले एक साल के स्टेटमेंट खंगाले, तो पता चला कि उन्होंने विभिन्न युवक-युवतियों से धोखे से कुल 37,69,000 रुपए का लेन-देन किया है। पुलिस अब उन पीड़ितों की पहचान करने की कोशिश कर रही है जिन्होंने लोकलाज के डर से शिकायत दर्ज नहीं कराई थी।
तीन नए आरोपियों की गिरफ्तारी, जेल भेजे गए
पुलिस ने जिन तीन नए आरोपियों को पकड़ा है, उनके नाम ताम्रध्वज मानिकपुरी (23 वर्ष, निवासी पाण्डातराई, जिला कबीरधाम), सियाराम साहू (23 वर्ष, निवासी ग्राम जंगलपुर, जिला कबीरधाम) और श्रृष्टि गोस्वामी (21 वर्ष, निवासी ममता नगर, राजनांदगांव) हैं। इन तीनों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।
इस पूरे फर्जीवाड़े की सूचना पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा को मिली थी। उनके निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर और नगर पुलिस अधीक्षक वैशाली जैन ने मामले की जांच की। जांच में ठगी की पुष्टि होने पर थाना बसंतपुर में मामला दर्ज किया गया।
ब्यूरो की संचालक और डायरेक्टर पहले ही अरेस्ट
गौरतलब है कि इस मामले में ब्यूरो की संचालक नेहा पाठक और डायरेक्टर धर्मेंद्र मानिकपुरी को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
राजनांदगांव पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी ऑनलाइन मैरिज ब्यूरो, सोशल मीडिया या व्हाट्सएप पर मिलने वाले विवाह प्रस्तावों पर आंख बंदकर भरोसा न करें। बिना पूरी जांच-पड़ताल और भौतिक सत्यापन के किसी को भी पैसे न दें।
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